आई वसंत आई (गीत)
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आई वसंत आई उपहार साथ लाई।
चटकी हसीन कलियां रुत प्यार की है छाई।
मदमस्तियों का आलम बहकी हरिक डगर है।
पुर्वा हसीं इधर है पुर्वा हसीं उधर है।
धरती पे हूर कोई जैसे हो उतर आई,
आई वसंत आई उपहार साथ लाई।
फूलों पे आके भंवरे अटखेलियां करे हैं।
बादे सबा के संग संग क्या महफ़िलें जमे हैं।
पत्तों की झनझनाहटें आवाज़ गुनगुनाई,
आई वसंत आई उपहार साथ लाई।
हरियालिओं से होकर किरणें चमक रही हैं ।
झरनों में निर्झरों में हर सू महक रही हैं।
अंबर में औ' धरा पे बादे-बहार छाई,
आई वसंत आई उपहार साथ लाई।
भंवरे निकल पड़े हैं तितली पे रंग छाया।
हो कामदेव जैसे धरती पे उतर आया।
गोरी ने भी चुनरिया अंबर में है उड़ाई,
आई वसंत आई उपहार साथ लाई।
धरती भी है वसंती अंबर भी है वसंती।
पूर्वा भी आई बन ठन रंग ओढ़ के वसंती।
इक रागिनी सुहानी कण-कण में है समाई,
आई वसंत आई उपहार साथ लाई।
© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'


