मिलना जब नयन तुम्हारे " पी " पर ठहरें

मिलना जब मुस्कुरा उठें चित्र के सारे रंग,


जब अठखेलियाँ करती हो किरणें

मिलना जब कलरव करते हों विहंग,


जब पावन निर्झरणी, मदमाती अविरल बहे

मिलना जब नौका बहे, निर्मोही धारा के संग...


मिलना जब कलरव करते हो विहंग....!


"मिलना तुम !"


~राकेश ठाकुर