
वो कहते हैं श्रृंगार लिखो
पर मैं हाहाकार लिखूँगा
बिंदिया चूड़ी नथिया काजल
छोड़ दो चीत्कार लिखूँगा
लहू उबलता नस नस में
वीर जवान दहाड़ लिखूँगा
महबूबा माशूका विरहन
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वो कहते हैं श्रृंगार लिखो
पर मैं हाहाकार लिखूँगा
बिंदिया चूड़ी नथिया काजल
छोड़ दो चीत्कार लिखूँगा
लहू उबलता नस नस में
वीर जवान दहाड़ लिखूँगा
महबूबा माशूका विरहन
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