वो कहते हैं श्रृंगार लिखो
पर मैं हाहाकार लिखूँगा
बिंदिया चूड़ी नथिया काजल
छोड़ दो चीत्कार लिखूँगा
लहू उबलता नस नस में
वीर जवान दहाड़ लिखूँगा
महबूबा माशूका विरहन
त्याग त्याग फ़टकार लिखूँगा
देश बंट रहा धर्म-जात में
ख़ुद को ही ज़िम्मेदार लिखूँगा
अब मैं हाहाकार लिखूँगा....
~राकेश ठाकुर (ठाकुरसाहब)
@aarke_thakur


