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रूह तपी है


रूह तप गई उस चाहत मेंअब ये तमन्ना कहां ले चलीकिस राह किस मुकाम को

बस एक अल्फाज सुननातेरा ख्वाब में आनामुकम्मल अब वो भी कहांमिलना मुस्किल अब उस सुकून को

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