उम्मीद के दीपक को जलाये,उम्मीद के उजाले में बैठा हुं !यूं ही रहेगा रोशन, जहां मेरा,उम्मीद की इस लौ को, हवा से बचाये,मजबुत दिवारे बनाये बैठा हुं !!