प्रेम शोर नहीं करता,वह दरवाज़ा भी नहीं खटखटाता,बस एक दिनआपके भीतरअपना कमरा बना लेता है।राजेश कुमार
प्रेम शोर नहीं करता,वह दरवाज़ा भी नहीं खटखटाता,बस एक दिनआपके भीतरअपना कमरा बना लेता है।
राजेश कुमार