तुम्हारी हँसी
किसी उत्सव जैसी लगती है,
और तुम्हारी खामोशी
ऐसी कविता
जिसे दिल बार-बार पढ़ना चाहे।
कभी महसूस किया है तुमने?
जब तुम पास होती हो
तो हवा भी धीमे चलती है,
जैसे समय खुद
हमारी बात सुनना चाहता हो।
मैंने प्रेम को
शब्दों में बाँधना चाहा,
पर हर बार
तुम्हारी आँखों ने
मेरी सारी भाषा बदल दी।
राजेश कुमार
