ये और बात है......

मैं जताता नहीं, 

तुम ये न समझना कि 

मुझे समझ आता नहीं . ...

जब तुम गैरो के गले लगती हो,

मुझे अकेला छोड़ जाती हो,

हंसती हो,मुस्कुराती हो,

कहकहे लगाती हो,

मैं अपने अन्दर ही गम छुपा लेता हूँ ,

तुम ये न समझना कि 

मुझे समझ नहीं आता, 

ये और बात है कि 

मैं जताता नहीं......

 मैं इन्तजार करता हूँ कि 

कब तुम मेरे पास आओगी, 

मेरे पास बैठोगी, मुझसे बातें करोगी तुम, 

मुझसे लिपट जाओगी, मैं अपने गम कहूँगा तुमसे, 

तुमसे सुनूंगा तुम्हारे मांझी की दास्तान, 

तुम कहती हो न सुनती हो,

चली जाती हो मुझसे दूर 

मेरे पास बैठे ही,

न जाने किसके साथ रहती हो,मेरे साथ रहते भी, 

तुम ये न समझना कि 

मुझे समझ आता नहीं, 

ये और बात है कि 

मैं जताता नहीं........