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उफ्फ


उफ्फ, ये सन्नाटा और तन्हाई,उस पर ऐ चांद,तेरी ये मंद मंद मुस्कान,तू जरा करीब आए,तो तेरा मुंह नोच लूं।

उफ्फ ये सन्नाटा और तन्हाई,उस पर ये चांद,आज इतना मद्धम,कि अपना साया भी गुम,साया ही होता,तो उससे बातें करता।

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