एक बरस और गुजर गया, 

तेरे बिन......

टुकड़ा टुकड़ा और बिखर गया, 

तेरे बिन.....

बन्द कर दिए गिनने  

साल महीने रात और दिन 

तेरे बिन ........

ये जो बची है चंद सांसे, 

निकल जाएंगी इक दिन 

तेरे बिन ......

फिर मिल कर पूछूँगा 

कैसे रही इतने बरस तुम

मेरे बिन .......