सत्य को जोर से उछालो आसमान में,

और देखो कोई लपकता है क्या?

बहुत बार उसे कोई नहीं लपकेगा,

औंधे मुंह गिरेगा।

कपड़े झाड़ कर खड़ा हो जाएगा तुरंत,

बिना किसी गिले शिकवे के,

यही पहचान है उसकी।

गर आए आवाज चीखने चिल्लाने की,

समझ जाना यह झूठ है,

सत्य के भेस में।