कहाँ से तुम आए,
कहाँ तुम चले गए,
कितने दर्द सहे,
कितनी नाकामयाबियां,
जिसे भी खबर थी,
अधूरी ही थी।
कब खुशियों का समय आया,
कब गम के दौर से गुजरे,
किसने पीठ में खंजर घोंपा,
किसने साथ दिया,
जिसे भी खबर थी,
अधूरी ही थी।
कितने मेले,
कितने तूफान,
भीड़ में भी अकेले,
जिसे भी खबर थी,
अधूरी ही थी।
