झोपड़ी और सड़क,
कुछ नहीं फर्क,
खुली हैं दोनों,
कोई भी घुस जाए,
बेबसी नीलामी पर है,
रोक नहीं पाते हैं।
घर अलग है,
एकमंजिले या बहुमंजिले,
थोड़े सुरक्षित हैं,
बेबसी वहां है पर
आपसे डरती है।
महल अलग हैं,
बेबसी किसी की हो,
उनके यहां गिरवी है


झोपड़ी और सड़क,
कुछ नहीं फर्क,
खुली हैं दोनों,
कोई भी घुस जाए,
बेबसी नीलामी पर है,
रोक नहीं पाते हैं।
घर अलग है,
एकमंजिले या बहुमंजिले,
थोड़े सुरक्षित हैं,
बेबसी वहां है पर
आपसे डरती है।
महल अलग हैं,
बेबसी किसी की हो,
उनके यहां गिरवी है