नदी के दो छोर,

नई पीढ़ी और मैं, 

चल रहे हैं साथ साथ, 

देख रहें हैं एक दूजे को, 

मेल है मुश्किल, 

उम्मीद है दोनों तरफ, 

होगा कैसे, 

ये नहीं पता, 

ख्याल बहुत है, 

रखना कैसे हैं, 

ये पता नहीं, 

छूट जाने का डर है, 

प्रेम मगर गहरा है, 

पानी का सहारा है, 

बह रहा जो बीच में, 

जरिया है संवाद का,

ये है जब तक बीच में, 

उम्मीद है .....

दोनों तरफ।