पचास पार, पिता जैसा हो गया हूँ,
समझ पा रहा हूँ उनकी चिन्ताएं,
महसूस कर सकता हूँ उनकी खुशी,
उनके भय,
सपने,
आशाएँ,
छटपटाहट,
हौसला,
और उनकी चुप्पी,
समझ पा रहा हूँ,
वो उस पार हैं अब,
मैं इस पार,
उनसे कह भी नहीं सकता,
समझता हूँ मैं....
आप चिंता न करें।
-- रजनीश--
