साल दर साल गुजरते जाते हैं 

तुझ बिन .....

एक साल और गुजर गया 

तुझ बिन ....... 

कहाँ होगी तुम ....

ईश्वर के पास या

मिल गया होगा नया जन्म .....

नये रिश्ते, नया नाम......

सब कुछ नया....

रमी होगी उन सबमें, 

भूल कर हमें, 

यही आदत भी है तुम्हारी 

खुद को भूलकर रिश्ते निभाने की


......

मैं क्या करूँ तुम्हारी यादों का...

पीछा ही नहीं छोड़ती......

नयी कोई याद न बनी 

तेरे जाने के बाद 

कोई अपना न रहा

तेरे जाने के बाद 

जीवन ये सादा न रहा

तेरे जाने के बाद 

नया कोई रिश्ता न बना

तेरे जाने के बाद 

जिन रिश्तों में छोड़ गयीं 

वो रिश्ते न बचे

तेरे जाने के बाद 

ओ माँ ........