जिस भी रूप में देखा तुझे, 

लाजवाब देखा, 

जमाने की सारी ताकतों में, 

तेरा ही नाम देखा, 

कभी माँ है, तो कभी बेटी है तू,

कहीं पत्नी तो कहीं प्रेयसी है तू,

झांसी की रानी की तलवार में 

गर तू है, 

मीरा के गीतों की तान भी तू, 

यशोदा का दुलार तुझमें है, 

तो राधा का प्रेम भी तू है, 

सीता सी साथी है तू अगर, 

दुर्गा की गर्जना भी तू ही, 

जब भी देखूँ चारों ओर, 

दुनिया पूरी लगे,जब साथ हो तू ।