दुनिया है तो मुल्क है,

मुल्क है तो सरहदे है,

सरहदे है तो सेनाएं है,

सेनाएं है तो युद्ध है,

और युद्ध है तो शहीदी है।


शहीद के पीछे परिवार है,

परिवार की अपनी सोच है,

सोच के पीछे स्वार्थ है,

स्वार्थ के लिए प्रपंचों का खेला है,

दुनिया एक मेला है।