यूं ही नहीं खुद को लाचार किया है,

हमने उनसे बहुत प्यार किया है।

बिखर गए हो कर ज़र्रा ज़र्रा,

खुद को उनपे जांनिसार किया है।

वो तो देते न थे अपने घर का पता,

घर घर जाकर हमने पता किया है।

मंजिलों की कभी परवाह नहीं की,

सफ़र में रहे ताउम्र,बस यही किया है।

ख्वाहिशें हजारों अधूरी चाहे रही हों,

उसका सदा ही हमने शुक्र किया है।

कहां कहां से हो कर यहां तक पहुंचा हूं,

वो पूछ रहे हैं क्या ये किया है, क्या वो किया है।

---रजनीश---