बोलता हूं तो,
चुभ जाता हूँ,
चुप रहूँ तो,
दम घुटता है।
हर चेहरे पर,
इतनी परतें हैं,
असल पर आते,
सालों लगते हैं।
रहना इसी जहाँ में है,
रहना मगर बड़ा मुश्किल है,
गले मिलते डर लगता है,
हर हाथ खंजर दिखता है।
मैं ही कौन दूध धुला हूँ,
झूठ सच कर लेता हूँ,
जब करता हूँ,
थोड़े दिन को मर लेता हूँ।


