जब भी बेबस हुआ होगा इन्सान,उसने पुकारा होगा,जिसने थामा उसका हाथ,वो खुदा हुआ होगा।यही रीत चली होगी,कुछ यूं ही हुआ होगा।हर दौर की पुकार में,कुछ फर्क रहा होगा,हर दौर का खुदा,तभी अलग हुआ होगा।कुछ यूं ही हुआ होगा।
जब भी बेबस हुआ होगा इन्सान,उसने पुकारा होगा,जिसने थामा उसका हाथ,वो खुदा हुआ होगा।
यही रीत चली होगी,कुछ यूं ही हुआ होगा।
हर दौर की पुकार में,कुछ फर्क रहा होगा,हर दौर का खुदा,तभी अलग हुआ होगा।
कुछ यूं ही हुआ होगा।