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ईश्वर 2


आनन्द का जब आए आवेग,प्रसन्नता बरसे चहुँ ओर,कहना चाहो,कह न सको,रुंध जाए गला,शब्दों का पड़े अकाल,तब अश्रु ही निकल आते हैं,ईश्वर तभी पास होते हैं,शब्द व्यर्थ हैं उनके लिए,वो भाव समझ जाते हैं।

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