जीवन में धूप मिली, छांव मिली,
फूल मिले,कांटे भी मिले,
साथ मेरे तो बस दीवाने चले।
ठंडी छांव में कुछ देर रुक के चले,
फूल जब दिखे, तो उन्हें सूंघ कर चले,
साथ मेरे तो बस दीवाने चले।
जाने वालों को विदा किया,
मिल के गले,
वापिस जो लौट आए,
उनसे हंस के मिले,
साथ मेरे तो बस दीवाने चले।
ठोकरें ऐसी लगी,
बिलबिला के चले,
पीठ में खंजर लगे,
काट दिए किसी ने गले,
साथ मेरे तो बस दीवाने चले।
सुख में मुस्कुराते रहे,
ग़म में खिलखिला के चले,
यूं सारी जिंदगी गुनगुना के चले,
साथ मेरे तो बस दीवाने चले।
---रजनीश---
