चल उठ चल,

रात हो गई, 

सूरज ढल गया, 

धरती का ताप कम हो गया, 

नंगे पांव भी चल पाएगा, 

कुछ मील तो आगे जा पाएगा। 


नाके पर सिपाही सोया होगा, 

खबरी भी अब घर में होंगे,

नेता किसी स्कीम में होगा।


पर चलना बच के, 

ट्रक बहुत हैं अब सड़क पर, 

ड्राइवर सोये पडे हैं उनमें, 

सड़क तो उनके बाप की है। 

चल उठ चल ....