गर वो माँगता कुछ,

मैं दे देता सब कुछ,

दिल दे देता,

मन दे देता,

जान दे देता,

उसने मांगा नहीं,

बस लगा रहा पीछे,

जैसे परछाई,

जैसे वक्त,

जैसे सुख,

जैसे दुख,

धीरे-धीरे मैं,

जो पक्का था,

मस्त था,

फक्कड़ था,

बदलने लगा,

धीरे-धीरे .....

मैं उस जैसा हो गया,

मैं सब जैसा हो गया,

मैं जग जैसा हो गया,

वो कौन था,

जो मेरे पीछे पड़ा,

जो अड़ा रहा,

कुछ कहा नहीं,

कुछ किया नहीं,

बस बदल गया,

मेरा सब कुछ,

बदल गया,

अब मैं ...

बस मैं नहीं हूँ।

-- रजनीश--