
कण कण में विराजे तू मै तुझसे क्या मांगू । .........
कण कण में विराजे है ,तू मईया हमारी है
मै तुझसे से क्या मांगू ,तू श्रसटी रचयिता है.......
कण कण में विराजे है.....
फूलो की खुसबू में ,इस नदिया जल थल में
पेड़ो की शाखों पे पर्वत की शिखाओ में
कण कण में विराजे है.....
मै पूजा कैसे कर लू ,क्या भोग चढ़ा दू मै
मै विनती कैसे कर
Read More! Earn More! Learn More!
