कण कण में विराजे तू मै तुझसे क्या मांगू । .........
कण कण में विराजे है ,तू मईया हमारी है
मै तुझसे से क्या मांगू ,तू श्रसटी रचयिता है.......
कण कण में विराजे है.....
फूलो की खुसबू में ,इस नदिया जल थल में
पेड़ो की शाखों पे पर्वत की शिखाओ में
कण कण में विराजे है.....
मै पूजा कैसे कर लू ,क्या भोग चढ़ा दू मै
मै विनती कैसे कर लू ,क्या गीत सुनाऊ मै
कण कण में विराजे है.....
मै फूल चढ़ाऊ तो। ....उसकी खुशबू में मईया तू
मै भोग लगाऊ। ......तो उस भोग में मईया तू
कण कण में विराजे है.....
मै तुछ स प्राणी हूँ ……..तू जगत विधाता है.....
कण कण में विराजे है.....तू मईया हमारी है
मै तुझसे से क्या मांगू …….. तू श्रसटी की रचयिता है.......
रजनी कपूर