आज धरा है रोती क्यों माली बैठा भूखा क्यों बगिया में पसरा सूखा क्यों हुआ बाढ़ सा मंज़र क्यों पूछ सको तो पूछो खुद से आज तम्हारी माँ क्यों रोती माली भूखा बगिया सुखी अंतर मन आवाज़ उठ आयी मत काटो इन वृक्षों को इन वन उपवन को ये सब श्रृंगार हमारे है, एक तू तो लाल हमारे है एक तू तो लाल हमारे है