मर्यादा's image
447K

मर्यादा

भिन्न भिन्न जगहों पर भिन्न भिन्न मर्यादा सखी,
कभी चौखट की ओट,कभी साथ निभाने बाहर भी,

मर्जी इसमें अपनी कहाँ, मज़बूरी है रिवाजों की,
साँस चलती अपनी जिसमें, इजाज़त मगर गैरों की,

चलने फिरने उठने बैठने हंसने बोलने सब पर तो रोक है,
पति है परमेश्वर पर दासी रही नारी सदा, ऐसा ये लोक है,

Read More! Earn More! Learn More!