
तुम्हे प्रह्लाद बनना चाहिए।।
है समय की मांग ये, तुम्हे प्रह्लाद बनना चाहिए।
मनुज मुस्कान दानवों का अवसाद बनना चाहिए।
अत्याचार की होली जले,
व्यभिचार की होली जले,
भ्र्ष्टाचार की होली जले,
कुविचार की होली जले।
दानव जले और तम जले,
दुख जले और मातम जले।
मूक इस संसार मे, तुम्हे संवाद बनना चाहिए।
है समय की मांग ये, तुम्हे प्रह्लाद बनना चाहिए।
तुम बहुभुज तुम सबल,
तुम में है संसार सकल,
तुम हो अग्नि तुम ही जल,
तुम पव
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