तू है अकेला।।
राह बताते सब हैं पर चलना तो अकेले होगा।
उगते के सब साथी पर ढलना तो अकेले होगा।
खुशियों की बारात, ग़म तन्हाई का किस्सा है,
कंधे तो बस पेश हुए, जलना तो अकेले होगा।
पोथी पुराण कहानी किस्से तो बस सूचक हैं,
ये दिशा दिखा देंगे पर बढ़ना तो अकेले होगा।
है ज्ञान, है यंत्र भी, ऊंचाई का भान कराने को,
पर्वत ऊंचा हो या नीचा, चढ़ना तो अकेले होगा।
भाव हैं कोई शब्द नहीं, कागज़ पे उकेरे जाएंगे,
इस जीवन रस में हो रत, पढ़ना तो अकेले होगा।
बातों से हैं सब साथ तेरे, पर सच्चाई से दूर खड़े,
जो मुश्किल है आन पड़ी, तनना तो अकेले होगा।
जीवन है भूलभुलैया, कौन साथ कौन छोड़ गया।
जीवन के सब हमराही पर मरना तो अकेले होगा।
©रजनीश "स्वछंद"


