कोई चांद जमीं पे लाता है, कोई तोड़ लाता है आसमा से तारे भी। गर मैं कर न सकूँ ये सब, तो क्या तब भी प्यार करोगे मुझसे।। जिंदगी की रफ्तार है बहुत तेज़, भागता हूँ मैं भी अनवरत, बिन रुके। गर रह गया मैं पीछे कहीं, तो क्या तब भी प्यार करोगे मुझसे।।।   हाथ की चंद लकीरों को ही बस जिंदगी समझता रहा अब तलक।। गर किस्मत भी दे दगा, तो क्या तब भी प्यार करोगे मुझसे।।। खुद का खुदा तो बन बैठा, पर बिताया है जिंदगी तेरी ही बंदगी में।। गर रह गयी कमी दुआओं में, तो क्या तब भी प्यार करोगे मुझसे।।।   तेरी ही आहटों पे टिकी हैं धड़कने, आती जाती सांसों की खनक भी तुम।। गर कल को सुनाई दे कुछ कम, तो क्या तब भी प्यार करोगे मुझसे।।।। तेरी आवाज़ पे बहलता है मन, रक्त प्रवाह भी दौड़ पड़ता है बेआवाज़।। गर शिथिल पड़ जाएं मेरी सांसें, तो क्या तब भी प्यार करोगे मुझसे।।।   जिंदगी को कभी चाहत का ग़ुलाम बनने न दिया, थीं मजबूरियां हज़ार। गर रखूं जीने की चाहत आज़ाद, तो क्या तब भी प्यार करोगे मुझसे।।। कुछ मांगने को ये हाथ उठते ही नही, खुद पे गुमां ही कुछ ज्यादा है। गर बन सका न याचक कोई, तो क्या तब भी प्यार करोगे मुझसे।।।