क्या क्या है किया हमने देखो।।

 

क्या राह चुनी हमने देखो,

कब किसकी सुनी हमने देखे।

 

कहने वाले बहुत मील पर,

बस गर्दन धुनी हमने देखो।

 

हर माली कुछ तो कहता था,

तकलीफ बुनी हमने देखो।

 

कुछ अपने थे कुछ कह के गए,

क्या बात सुनी हमने देखो।

 

ज्ञान की भाषा सबने कही पर,

माना खुद को गुनी हमने देखो।

 

हर पाप किये मैं बैठा था,

कह खुद को मुनि हमने देखो।

 

मज़हब का ठेकेदार रहा,

बता खुद को पुणी हमने देखो।

 

हर राग में नुक्स निकाला था,

रमाये बैठ धुनी हमने देखो।

 

अब रो रो आंख भिंगोते हैं,

जीवन कर ली सूनी हमने देखो।

 

©रजनीश "स्वछंद"