खुद से भी किनारा करता हूँ।।।'s image
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खुद से भी किनारा करता हूँ।।।

खुद से भी किनारा करता हूँ।।।

 

टूटे बिखरे ज़मीर को अपने, अपलक निहारा करता हूँ।

अपने भी पीछे छूट गए, खुद से भी किनारा करता हूँ।

 

टूट साख गिरा जमीं पर, हवा न थी, पतझड़ भी नहीं,

रौशन भी नहीं, न तेज रहा, खुद को सितारा कहता हूँ।

 

मूक रहा, बधिर रहा, बापू के तीन बन्दर सा भी नहीं,

हाथ जुड़े औ पांव बंधे, नत आंखों से इशारा करता ह

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