
कब बिन सुबह के रात हुई।।
कब बिन सुबह के रात हुई,
कब तन्हा तन्हा बात हुई।
दिल तो तब टूटा मेरा था,
उनसे जो मुलाकात हुई।
है मुक्कमल इश्क कहाँ,
हर राह पे मुश्किल रोड़े हैं।
जो आज भी हैं दिलबर के संग,
गिनती के बचे वो थोड़े हैं।
प्यार किया फिर भुला दिया,
ऐसे हज़ारों किस्से हैं।
तू अपना फर्ज निभाता जा,
बिखरे बिखरे कई हिस्से हैं।
समय का पहिया रुक न पाए,
तुझको चाल मिलानी है।
तू ठहरा रहा, वो निकले आगे,
ये प्यार तो आनी जानी है।
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