कब बिन सुबह के रात हुई।।

 

कब बिन सुबह के रात हुई,

कब तन्हा तन्हा बात हुई।

दिल तो तब टूटा मेरा था,

उनसे जो मुलाकात हुई।

 

है मुक्कमल इश्क कहाँ,

हर राह पे मुश्किल रोड़े हैं।

जो आज भी हैं दिलबर के संग,

गिनती के बचे वो थोड़े हैं।

 

प्यार किया फिर भुला दिया,

ऐसे हज़ारों किस्से हैं।

तू अपना फर्ज निभाता जा,

बिखरे बिखरे कई हिस्से हैं।

 

समय का पहिया रुक न पाए,

तुझको चाल मिलानी है।

तू ठहरा रहा, वो निकले आगे,

ये प्यार तो आनी जानी है।

 

ख़्वाबों के महल हैं बनते कहाँ अब,

बात ही थोड़ी और ज्यादा है।

खेल रहा है खेल कहीं कोई,

तू तो बस एक शतरंज का प्यादा है।

 

खुशकिस्मत है तू दुनिया मे,

जो तुझे किसी का प्यार मिला।

कोई रहा खुश पहने वरमाला,

किसी की तस्वीर को हार मिला।

 

थे वो अपने कहाँ जो छोड़ गए,

तू क्यूँ अश्क बहाता है।

ख़ुदा भी सबकी ख़ातिर तो,

कोई न कोई बनाता है।

 

रोना धोना छोड़ जरा तू,

हुई सुबह इस रात की।

इतनी सी ही मियाद बनी थी,

तुम दोनों के साथ की।

 

©रजनीश "स्वछंद"