भूली हुई एक बात लिखूं।।

 

मैं भूली हुई एक बात लिखूं।

वो बीते सारे दिन रात लिखूं।

 

तुम भी भूले मैं भी भटका था,

पल दो पल का वो साथ लिखूं।

 

रंगी जीवन कर डाले थे जो,

मेहंदी भरी मैं वो हाथ लिखूं।

 

होंठो तक जो ना पहुंचे थे,

दिल मे छुपे जज़्बात लिखूं।

 

आंखे ही बस मिलती रहीं,

नुक्कड़ पे हुई मुलाकात लिखूं।

 

आशिक कह लो मेहबूब कहो,

अपने इश्क की जात लिखूं।

 

कुछ ज़ख्म हरे से लगते हैं,

आज मैं दिल में बांध लिखूं।

 

कल तक जो सूरज थे मेरे,

अब दिन में भी उन्हें रात लिखूं।

 

©रजनीश "स्वछंद"