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भूली हुई एक बात लिखूं।।_रजनीश "स्वच्छंद"

भूली हुई एक बात लिखूं।।

 

मैं भूली हुई एक बात लिखूं।

वो बीते सारे दिन रात लिखूं।

 

तुम भी भूले मैं भी भटका था,

पल दो पल का वो साथ लिखूं।

 

रंगी जीवन कर डाले थे जो,

मेहंदी भरी मैं वो हाथ लिखूं।

 

होंठो तक जो ना पहुंचे थे,

दिल मे छुपे जज़्बात लिखूं।

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