
आस्तीन के सांप।।।
कब तक देश संभालेगा,
अब नए नए जयचंदो को।
कब तक जनता देगी बढ़ावा,
कुत्सित कुंठित इन धंधों को।
बहुत हुआ अब ये न चलेगा,
न आस्तीन में सांप पलेगा।
दुश्मन की जो बोलेगा भाषा,
जनता को जो देगा झांसा,
अब सबको उठना होगा,
गुस्से को भी फूटना होगा,
कब तक मां बर्दाश्त करेगी,
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