
अपनी लाश लिए मैं चलता हूँ।।
अपने कंधों पर अपनी लाश लिए मैं चलता हूँ।
हाथों में ही खुद का विनाश लिए मैं चलता हूँ।
मंदिर मस्ज़िद और गुरुद्वारों में बांटा जाता हूँ,
निजसंग परिचय अपना खास लिए मैं चलता हूँ।
मैं ठगा गया मैं छला गया पग पग धोखे खाये हैं,
निज्मन के हर कोने में उपहास लिए मैं चलता हूँ।
जिसको अपना बोला था, बदले बदले से लगते हैं,
दिल मे उनके तंज का अट्टहास लिए मैं चलता हूँ।
बन्धन में भी बांधा मैं गया, रिश्ते की बेड़ी पड़
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