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पेढ़ की कहानी पेढ़ की ज़ुबानी

कहनी थी इक बात मगर क्या सुन सकते हो ? मैं नित नित जीवन ज्वाला में जलता बुझता हूँ , क्या अंश मात्र भी दीपक सा तुम जल सकते हो । बादल बिजली की गरज यही संगीत मेरे हैं , क्या एक अंतरा तुम भी इनका सुन सकते हो । मैं धूप छाँव में सालों साल खड़ा रहता हूँ , क्या तुम दिनभर को मात्र धूप में रह सकते हो । मैं पतझड़ सावन और
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