आओ कुछ ऐसा करे अब सोच में मकरंद भर दें ,

आओ कुछ ऐसा करे अब भाव में रसरांग भर दें ,

छा गयी है शून्यता जो आज उसको ख़त्म करदे ।


जो खिलौने टूट गए है उनको कब तक रोएँगे ,

यह शरारत जिसने की है वह भी एक दिन रोएँगे ,

क्या गाजनियों के दर के चलते निर्माँड़ करना बंद कारदें ?

आओ कुछ ऐसा करे अब सोच में मकरंद भर दें ,

आओ कुछ ऐसा करे अब भाव में रसरांग भर दें ।


जो लगे हैं ज़ख़्म दिल पर आओ अब उनको भुला दें ,

जो चमन उजड़ा हुआ है आज फिर उसको बसा दें ,

क्या टिड्डियों के दर के चलते फसल बोना बंद कर दें ?

आओ कुछ ऐसा करे अब सोच में मकरंद भर दें ,

आओ कुछ ऐसा करे अब भाव में रसरांग भर दें ।



जो हुआ है फिर ना होगा कौन ये वादा करेगा ?

फिर नहीं ञयचंद होगा कौन ये वादा करेगा ?

क्या भेदियों के भय के चलते शत्रु भेदन बंद करदें ?

आओ कुछ ऐसा करे अब सोच में मकरंद भर दें ,

आओ कुछ ऐसा करे अब भाव में रसरांग भर दें ,

छा गयी हैं शून्यता जो आज उसको ख़त्म कर दें ।