पानी पर पत्थर तैरा दो ,

फिर से दुनिया को दिखला दो,

वेदों की जननी भारत को उसका खोया सम्मान दिला दो |

कर भगीरथ प्रयास फिर से कोई गंगा लाओ ,

यदि सागर को हो घमंड बन अगस्त्य उसको पी जाओ |

अग्निबाड़ जैसे बमवर्षक पहले भी पास हमारे थे ,

अंतरिक्ष विज्ञान के ज्ञाता विश्वामित्र हमारे थे |

आज ग्रहों के बारे में कोई क्या भारत को बतलाएगा ,

हनुमान की तरह कभी क्या सूरज पर छा पाएगा ?

पुष्पक विमान के निर्माता को मत यानो की धमकी दें ,

ब्रहमास्त्र रखने वालों को मत शस्त्रों की धमकी दे ,

ये महायुद्ध लड़ने वाले क्या चक्रव्यूह रच सकते हैं ?

एक अकेले अभिमन्यु से क्या सब मिलकर लड़ सकते हैं ?

लेकिन ,

एकलव्य की तरह साधना आज मुझे करनी होगी ,

प्रहलाद की तरह भावना आज मुझे भरनी होगी ,

राम राज्य का स्वप्न तभी हम सब पूरा कर पाएँगे ,

केसरिया का मान तभी इस धरती पर रख पाएँगे ।