रंजो ग़म को ज़िन्दगी से यूं मिटा देते हैं हम जलते दीपक को अंधेरों का पता देते हैं हम रहगुज़र के मोड़ पर रखते हैं इक रोशन चराग़ हादसों से हर मुसाफ़िर को बचा देते हैं हम इश्क़ में ज़ख़्मी दिलों का ढूंढ लाए हैं इलाज ला दवा है दर्द जो, उस की दवा देते हैं हम तुम हमारी तश्नगी से यार वाकिफ़ ही नहीं आ गए पीने पे तो दरिया सुखा देते हैं हम हाथ हम अपने उठाते हैं ख़ुदा के सामने लोग कहते हैं कि बिछड़ों को मिला देते हैं हम ये वफ़ा 'दिलदार' की चाहत नहीं ईमान है जो वफ़ा से दूर हैं उन को सज़ा देते हैं हम