4 वर्ष की उम्र में मेरे, दिल ने लिया था मान

इस दुनिया में बस मेरे, हैं पापा बड़े महान


फिर जाना की प्यार था उनका, सच में बेमिसाल

यही समझने देखो हमको, लागे थे 9 साल


बारवें साल ने देखो कैसे, मन को मेरे मोड़ा

वैसे तो अच्छे है लेकिन, ग़ुस्सा करते थोड़ा


मेरी इच्छाओ का पापा, करते हैं सम्मान

बस 16 की उम्र मे उनसे, पूर्ण हुई पहचान


योगासन मे ध्यान लगाना, उनका था ये कहना

25 साल मे उनसे सीखा, कैसे है खुश रहना


वक्त ने हमको दिखलाया, जब गए पापा से दूर

जीवन के हर संघर्षों से, हो गए थक के चूर


35 साल मे मुश्किल था जब, बच्चों को समझना

जाने कैसे कर जाए पापा, था हमको वो अपनाना


हम 40 साल की उम्र मे लाए, बच्चों मे अनुषाशन

पर पापा रखते थे हम सबपर, प्यार से अपना शासन


बस पूर्ण 50 किए हैं फिर भी, ऋण से है पहचान

पर पापा के चेहरे पे रहती, कर्ज मुक्त मुस्कान


हरदम पाने की चाहत मे, भूल गए हम जीना

पर 70 की उम्र मे पापा, चलते तान के सीना


मात पिता के उम्मीदों की, जो तोड़ोगे आस

याद रहे फिर यही बात को, दोहराएगा इतिहास


(राजेश जोशी)