थकी शाम ने ओढ़ ली देखो, काले बादल की चादर |लहरों ने फिर चुप्पी साधी, करने शाम का फिर आदर |आसमां के माथे पे, है निखरी चाँद की बिंदिया |पवन के झोंके शाम की आँखों, मे लाते है निंदिया ||
थकी शाम ने ओढ़ ली देखो, काले बादल की चादर |लहरों ने फिर चुप्पी साधी, करने शाम का फिर आदर |
आसमां के माथे पे, है निखरी चाँद की बिंदिया |पवन के झोंके शाम की आँखों, मे लाते है निंदिया ||