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बेजुबान सोच


सोच को भी तुम अपनी रखना, एतिहाद से हरदमवरना शब्द बिखर जाएंगे, जैसे स्वास बिना ये तन

हाल पूछने लोग हैं आते, जब आँख हो तेरी नमवही लोग जख्मों से तेरे, चुराते हैं मरहम ||

— राजेश जोशी
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