1-धरना पहले खोलिए,पीकर थोडा जूस, राजमहल में दाखिला, आगे छक कर घूस। 2-लोकपाल समझे नहीं,राजनीति की चाल, चतुराई से जाँच के,बदले सभी सवाल। 3-भोलापन,मासूमियत,दिखते सिर्फ चुनाव, जिद्दी होता जा रहा,सत्ता का स्वभाव। 4-झूठ करे उद्घोषणा,सत्य करे संताप, राजनीति का गाँव है,समझो थोडा आप। 5. रोज नहाए दूध से,गंगाजल के साथ, कुर्सी काली भूतनी,कर दे काले हाथ। 6-'धनीलाल' निर्धन मिला,'धर्मवीर' असहाय, 'सत्यवान' झूठा बहुत, करे 'नीति' अन्याय।