मोहब्बत ऊंचे पेड़ पर बैठी है पंहुच पाओगे?साख नाज़ुक है संभल पाओगे ?तूफान का़ भी डर है दौरान-ए -सफ़र ,गिरे जो कहीं जमीं पर सोच लो ,उठ पाओगे?
मोहब्बत ऊंचे पेड़ पर बैठी है पंहुच पाओगे?साख नाज़ुक है संभल पाओगे ?
तूफान का़ भी डर है दौरान-ए -सफ़र ,गिरे जो कहीं जमीं पर सोच लो ,उठ पाओगे?