मोहब्बत ऊंचे पेड़ पर बैठी है पंहुच पाओगे?
साख नाज़ुक है संभल पाओगे ?
तूफान का़ भी डर है दौरान-ए -सफ़र ,
गिरे जो कहीं जमीं पर सोच लो ,उठ पाओगे?
~राजेश काशीवासी


मोहब्बत ऊंचे पेड़ पर बैठी है पंहुच पाओगे?
साख नाज़ुक है संभल पाओगे ?
तूफान का़ भी डर है दौरान-ए -सफ़र ,
गिरे जो कहीं जमीं पर सोच लो ,उठ पाओगे?
~राजेश काशीवासी