मन में सेवाभाव तन पर खाकी,दुःख सुख के होते हैं साथी,मानवता के वो दीवाने,ना पूछे धरम ना पूछे जाति,
मन में सेवाभाव तन पर खाकी,दुःख सुख के होते हैं साथी,
मानवता के वो दीवाने,ना पूछे धरम ना पूछे जाति,