तू तान के सीना चल तुझे डर किस बात का है,
वोsssss जो खतरा है ना सिर्फ़ नाम का है,
सारी निगाहें तुझे ही देख रहीं हैं इक टक इस भीड़ में,
क्योंकि तू सुबह का सूरज़ है और वो शाम का है,
~राजेश काशीवासी


तू तान के सीना चल तुझे डर किस बात का है,
वोsssss जो खतरा है ना सिर्फ़ नाम का है,
सारी निगाहें तुझे ही देख रहीं हैं इक टक इस भीड़ में,
क्योंकि तू सुबह का सूरज़ है और वो शाम का है,
~राजेश काशीवासी