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कविता ऐसी होनी चाहिए - राजेश तैलंग

कविता ऐसी होनी चाहिए 

जिसकी तहें खोल कर 

शॉल की तरह ओढा जा सके

एक चादर के जैसे बिछाया भी जा सके

जिसे रबर के जैसे खींच कर 

Tag: poetry और3 अन्य
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