जानवरो के भी तो अधिकार है
सिर्फ़ इंसान रहेगा फाइव स्टार में?
ये तो ग़लत हैं
हमे जंगल भी आधुनिक चाहिए
मोदी जी के राजमहल जैसा
उनको ईर्ष्या हो गई थी
प्रधान सेवक के मोर, बतख और बछड़े से
करने लगे थे आंदोलन
हाथो में लेकर तख्तियां
हमे चाहिए हमारा घर
काँच का घर, चकाचक
जहाँ हो दिल्ली की तर्ज़ पर
मोहल्ला क्लिनिक
स्कूलों की तरह वर्ल्ड क्लास फैसिलिटीज़
कोने कोने पे सीसीटीवी
पर आंदोलनों को ये सरकार सुनती कहाँ है
धकेल दिए गए किसानों की तरह
दिल्ली की सीमा के पार
तुम धरना करो
या आमरण अनशन करते मर जाओ
बूचड़खाने थोड़ी बंद होंगे
चन्दा बहुत आता है शंकराचार्य जी
ज़्यादा उड़ोगे तो पर कतर दिए जायेगे
“आप” की आपदा का हस्र तो देखा होगा
डर गए अराजक जंगल वाले
भगवान के घर देर है अंधेर नहीं
अनंत को एहसास हुआ
हाथियों की पीड़ा का
उनके महाकाय शरीर और उसकी भूख का
भूख तो उसे भी थी
पैसों की अकूत संपत्ति से
तृप्ति थोड़ी मिलती है
उसके उत्कृष्ट मस्तिष्क में
तुरंत ही आया ,
दोनों की भूख मिटाने का
ग्रेटेस्ट आईडिया - वनतारा
जहाँ सरकारें गिरती हैं,
आर्थिक तंगी छा जाती है।
युद्ध के दौरान
कौन देखता है जानवरों को?
वे बनते हैं शिकार—
शिकारियों के, बमों के, गोलियों के।
कभी ट्रक के नीचे कुचलते,
भूख से गलते शरीर पर
गिद्धों की नज़र पड़ती है।
वो मरें उससे पहले
उन्हें शिफ्ट कर लिया जाता है
वनतारा—
फाइव स्टार फॉरेस्ट स्टार में।
कुछ स्टार प्रचारक तो दंडवत हो जाते हैं,
जिनके राज्य में
हाथी “डांगोरिया बाबा” कहलाते हैं,
पूजे जाते हैं।
उनकी रक्षा को माना जाता है महापुण्य।
मगर, जंगल में
हाथी अकेला थोड़ी रहेगा।
जंगल का असली माहौल तो तभी होगा,
जब उसके साथ बाक़ी जानवर भी होंगे
वैसे भी,
मगरमच्छ का तो गुजरात से
पुराना नाता है।
काँच के घर बने हैं अब,
पहले चिड़ियाघर थे जैसे थाने के लॉकअप।
अब तो शीशमहल के टक्कर के—
आखिर, विश्व की हस्तियाँ जो आएँगी,
सेलेब्रिटीज़, विदेशों से।
महामानव झुकेंगे,
अंबानी का अनंत प्रेम जो है वनतारा से।
डॉक्टर, सेवक, सब लगाए गए,
और वनतारा बन गया तैयार।
जामनगर के सदाबहार जंगल,
पहले बंजर बनाना,
फिर सरकार से पाना,
फिर से जंगल सजाना।
जीव सेवा मुफ्त नहीं होती,
व्यापार की सोच कहां रुकती है।
अब वनतारा हर बुकिंग साइट पर,
टिकट का मूल्य?
अंबानी मुस्कुरा रहे हैं—
"लेट मी थिंक।"
